AI बना हैकर्स का नया हथियार: जो साइबर अटैक पहले दिनों में होते थे अब मिनटों में; रैंसमवेयर में 5 गुना उछाल, भारत टॉप टारगेट में शामिल

AI बना हैकर्स का नया हथियार: जो साइबर अटैक पहले दिनों में होते थे अब मिनटों में; रैंसमवेयर में 5 गुना उछाल, भारत टॉप टारगेट में शामिल

AI बना हैकर्स का नया हथियार: जो साइबर अटैक पहले दिनों में होते थे अब मिनटों में; रैंसमवेयर में 5 गुना उछाल, भारत टॉप टारगेट में शामिल

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जहां कामकाज आसान बना रहा है, वहीं साइबर अपराधियों के हाथ में यह एक विनाशकारी हथियार बन चुका है। 'माइक्रोसॉफ्ट डिजिटल डिफेंस रिपोर्ट 2026' ने पूरी दुनिया में सनसनी मचा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन साइबर हमलों को अंजाम देने में पहले कई दिन लगते थे, अब AI टूल्स की बदौलत हैकर्स सिस्टम की कमियों को मिनटों में ढूंढकर डेटा उड़ा रहे हैं। बीते एक साल में रैंसमवेयर अटैक में 5 गुना से ज्यादा का जबर्दस्त उछाल दर्ज किया गया है।

दुनियाभर में साइबर हमलों के निशाने पर सबसे ऊपर सरकारें (27%), आईटी सेक्टर (17%) और डिफेंस-रिसर्च संस्थान हैं। सर्वाधिक प्रभावित देशों में अमेरिका (25.5%) और इजराइल (7.6%) के साथ भारत (2.5%) भी टॉप 7 देशों की फेहरिस्त में शामिल है।

पहली बार AI से ऑटोमेटेड साइबर हमले

रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अब बिना इंसानी मदद के AI एजेंट खुद ही 32-स्टेप वाले खतरनाक साइबर हमले की योजना बनाकर उसे अंजाम दे रहे हैं और यूजर अकाउंट्स पर कब्जा कर रहे हैं। जुलाई 2026 में 'जेडपुफ्ट' नाम से सामने आया पहला पूरी तरह ऑटोमेटेड रैंसमवेयर खुद ही हमले की प्रक्रिया चलाकर वसूली तक पहुंच गया। सॉफ्टवेयर में कमी मिलते ही औसत हमला समय 24 घंटे से भी कम हो गया है, जिससे कंपनियों को संभलने का मौका तक नहीं मिल पा रहा।

हमलों के नए व चौंकाने वाले तरीके:

  • वॉयस फिशिंग में 502% की बढ़ोतरी: एक साल में वॉयस फिशिंग 502% बढ़ी है, जबकि माइक्रोसॉफ्ट प्लेटफॉर्म टीम्स जैसी सर्विसेज पर फर्जी कॉल कर कर्मचारियों को फंसाने के मामले 8 गुना बढ़ चुके हैं।

  • QR कोड का जाल: ईमेल या पीडीएफ में भेजे जा रहे कोड को स्कैन करते ही सिस्टम हैक हो रहा है। माइक्रोसॉफ्ट ने एक साल में 14.5 करोड़ क्यूआर फिशिंग अटैक पकड़े हैं।

  • बॉस बनकर ठगी: 85% मामलों में हैकर्स कंपनी के बॉस, एचआर या वेंडर की पहचान चुराकर पेरोल और बैंकिंग में सेंध लगा रहे हैं। 11 लाख डिवाइसों पर ऐसी खतरनाक गतिविधियां देखी गई हैं।